7वां वेतन आयोग: केन्द्रीय कर्मियों के न्यूनतम वेतन का मामला एक बार फिर से मिडिया में चर्चा का विषय बना।

7वां वेतन आयोग: केन्द्रीय कर्मियों के न्यूनतम वेतन का मामला एक बार फिर से मिडिया में चर्चा का विषय बना।

7वां वेतन आयोग: केन्द्रीय कर्मियों के न्यूनतम वेतन का मामला एक बार फिर से
मिडिया में चर्चा का विषय बना।

वर्ष 2017 बीतने के साथ ही नये वर्ष में एक बार फिर से मिडिया में केन्द्रीय
कर्मियों के न्यूनतम वेतन में बढ़ोत्तरी का मामला जोर पकड़ रहा है। मिडिया
रिपोर्टों के अनुसार सरकार विषेशकर केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री अरूण जेटली
न्यूनतम फिटमेन्ट फैक्टर को 2.57 से बदलकर 3.00 करते हुए न्यूनतम वेतन 18000
से बढ़ाकर 21000 करने को तकरीबन राज़ी हो चुके हैं। मिडिया में यह भी खबर आई
कि केन्द्र सरकार नये साल अर्थात् 01 जनवरी 2018 से ही इस बढ़ोत्तरी लागू करने
को इच्छुक है। परन्तु करीब 19 माह बीतने के बाद आज भी केन्द्रीय कर्मियों में
अनिश्चितता की स्थिति है।
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इस बीच सरकार नेशनल अनोमली कमिटि एन.ए.सी का गठन कर दिया। खबरों के मुताबिक
एन.ए.सी भी न्यूनतम वेतन में ​वृद्धि के लिए सैद्धान्तिक रूप से सहमत थी
परन्तु इस खबर का खण्डन डिपार्टमेन्ट आॅफ पर्सनल एवं ट्रेनिंग डी.ओ.पी.टी. ने
ही पत्र जारी करते हुए ​कर दिया। अपने पत्र में डी.ओ.पी.टी ने यह स्पष्ट
उल्लेख किया कि वेतन वृद्धि का मामला वेतन विसंगति नहीं है अत: यह मामला
एन.ए.सी. के दायरे में ही नहीं आता है। इसके बाद यह भी खबर आई कि सरकार एक
उच्च स्तरीय समिति के गठन करेगी। इसमें सभी विभागों के मंत्रियों और
अधिकारियों का शामिल किया जाएगा। इस समिति में गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय
के सचिवों के अलावा डिपार्टमेंट आॅफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग, पेंशन, रिवेन्यू,
एक्सपेंडेचर, हेल्थ, रेलवे बोर्ड के साइंस एंड टेक्नोलॉजी के चेयरमैन और
डिप्टी कैग इसके मेंबर हो सकते हैं। कैबिनेट सचिव श्री प्रदीप कुमार सिन्हा
इसके अध्यक्ष हो सकते हैं। हालांकि आधिकारिक रूप से इस बारे में कोई जानकारी
नहीं दी गई है।
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ताज़ा रिपोर्टों की मानें तो अब सरकार इस बारे में विचार कर रही है कि ​सीनियर
और मिड लेवल के कर्मचारियों के सैलरी में कोई बदलाव न करते हुए निचले स्तर के
​कर्मचारियों अर्थात् लेवल 5 तक के केन्द्रीय कर्मियों के वेतन में वृद्धि की
जाए।
विदित हो कि केन्द्र सरकार के करीब 48 लाख कर्मचारियों एवं 52 लाख
पेंशनधारियों को सातवां वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप संशोधित वेतनमान एवं
पेंशन करीब 19माह पूर्व जुलाई 2016 से ही लागू हो चुका है। 7वें वेतन आयोग ने
मूल वेतन में 14.27 प्रतिशत की वृद्धि तथा फिटमेंट फैक्टर 2.57 गुणा करने की
सिफारिश की थी जिसे सरकार ने जुलाई 2016 से ही लागू करते हुए न्यूनतम मूल वेतन
7000 से बढ़ाकर 18000 लागू कर दिया। जबकि केन्द्रीय कर्मियों की लम्बे समय से
यह मांग रही है कि फिटमेन्ट फैक्टर को 2.57 गुणा के स्थान पर 3.68 गुणा करते
हुए न्यूनतम वेतन 26000 लागू किया जाए। 
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