एससी/एसटी समुदाय पदोन्नती में आरक्षण के पात्र हैं — केन्द्र

एससी/एसटी समुदाय पदोन्नती में आरक्षण के पात्र हैं — केन्द्र
अनुसूचित जाति/जनजाति को सरकारी सेवा में पदोन्नती में आरक्षण के सम्बन्ध में
केन्द्र सरकार ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय को कहा है कि अनुसूचित जाति/जनजाति
सरकारी कर्मचारी पदोन्नति में कोटा प्राप्त करने के लिए स्वत: रूप से योग्य
थे। सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय से सरकारी नौकरियों में एससी/एसटी कोटा पर 12
वर्ष पूर्व के फैसले पर पुनर्विचार करने का भी आग्रह किया। टाईम्स आॅफ ​इंडिया
की रिर्पोट के अनुसार सरकार ने यह तर्क एम नागराज के फैसले की जांच के लिए
गठित पांच खंडपीठ न्यायाधीश की स्थापना के बाद दी है।

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सरकार के इस तर्क में यह भी कहा गया है कि एससी / एसटी समुदाय की पिछड़ापन
निर्धारित करने के लिए डेटा का संग्रह व्यवहार्य और वांछनीय नहीं है। केन्द्र
सरकार ने एक लिखित नोट दायर करते हुए इस बात का उल्लेख किया कि उक्त जातियों
को समुदाय के सदस्यों द्वारा उनको प्राप्त होने वाले यातना और पीड़ाओं को
जानकर संसद द्वारा बिल पारित करने के बाद अनुसूचित जाति की सूची में शामिल
किया गया था। इस नोट में यह भी कहा गया कि संसद द्वारा भौगोलिक अलगाव के साथ
ही साथ विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को प्रतिष्ठित करने के लिए ही अनुसूचित
जनजातियों को भी उक्त सूची में जोड़ा गया था। उनकी पिछड़ापन का निर्धारण इस
बात से भी किया गया था कि वे लोग समुदाय के अन्य लोगों के संपर्क में नहीं थे,
अत: वे सदियों से पीड़ित थे।
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अपने बयान में, केंद्र ने कहा कि समुदाय को पिछड़ेपन के आधार पर एससी या एसटी
के रूप में शामिल किया जाने के बाद उनके ‘पिछड़ापन’ का परीक्षण पूरा हो जाता
है। पिछड़ापन दोनों सामाजिक-आर्थिक विशेषताओं का एक अंतःक्रिया है। जबकि
आर्थिक पिछड़ापन मात्रात्मक हो सकता है। सामाजिक पिछड़ापन निर्धारित करने के
लिए प्रॉक्सी खोजना मुश्किल है।
केंद्र ने पदोन्नति के उद्देश्य के लिए अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति
कर्मचारियों की पिछड़ेपन के परीक्षण के बारे में भी तर्क दिया, और कहा,
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति एक जैसा ही समूह हैं और आर्थिक और सामाजिक
उन्नति के आधार पर उन्हें फिर से समूहित करने के लिए कोई भी कार्रवाई उचित
नहीं होगी। इसके अलावा, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सामाजिक और
आर्थिक पिछड़ेपन को निर्धारित करने के लिए, आवश्यक डेटा के प्रकार, डेटा
संग्रह के आवधिकता, स्रोतों को एकत्रित करने के तरीके और प्रमाणीकरण के लिए
विधि के बारे में निर्णय लेना संभव नहीं होगा।
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