आयकर – छूट मुक्त प्रणाली – विवरण (लोकसभा प्रश्न संख्या 1650)

आयकर – छूट मुक्त प्रणाली – विवरण (लोकसभा प्रश्न संख्या 1650)

आयकर – छूट मुक्त प्रणाली – विवरण (लोकसभा प्रश्न संख्या 1650)

भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
लोक सभा

अतारांकित प्रश्न सं. 1650
(जिसका उत्तर सोमवार, 02 मार्च, 2020/12 फाल्गुन, 1941 (शक) को दिया जाना है)

छूट मुक्त आयकर प्रणाली

1650. श्री डी.एन.वी. सेंथिल कुमार एस.

श्रीमती सुप्रिया सदानंद सुले:
श्री श्रीनिवास दादासाहेब पाटील:
श्री कुलदीप राय शर्मा:
डॉ. अमोल रामसिंह कोल्हे:
डॉ. सुभाष रामराव भामरे:
क्या वित्त मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे किः

(क) क्या सरकार की छूट मुक्त आयकर प्रणाली अपनाने की योजना है और यदि हां, तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है और इसके क्या कारण हैं;

(ख) क्या छूट समाप्त करने से जीवन बीमा उत्पादों और म्यूचुअल फंड की बचत योजना से जुड़ी इक्विटी निरूत्साहित नहीं होगी;

(ग) यदि हां, तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है और इस संबंध में क्या सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं;

(घ) क्या सरकार करदाताओं को आयकर प्रतिदान प्रदान करने के लिए उत्साहित है और यदि हां, तो आयकर प्रतिदायों के लिए औसतन कितना समय लिया जाता है;

(ड.) वर्ष 2015 से लेकर अब तक सभी लंबित आयकर प्रतिदायों का ब्यौरा क्या है और आज की तारीख के अनुसार कितने लोग आयकर प्रतिदायों की प्रतीक्षा कर रहे हैं और विलंब के क्‍या कारण हैं; और

(च) सरकार द्वारा आयकर प्रतिदाय समयबदध तरीके से जारी करने के लिए अन्य कया कदम उठाए गए हैं?

उत्तर

वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री अनुराग सिंह ठाकुर)

(क) माननीय वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2015-16 के लिए केन्द्रीय बजट पेश करते समय बताया था कि कर दरों को कम करने के साथ-साथ आयकर अधिनियम, 1961(अधिनियम) के अन्तर्गत निगमित करदाताओं को दी गयी कटौतियां तथा प्रोत्साहन चार वर्षों में चरणबद्ध तरीके से खत्म कर दिए जाएंगे। यह भी बताया गया कि इसके फलस्वरूप हमारा उद्योग प्रतिस्पर्धी बनेगा, कर अभियोजन में कमी आयेगी तथा राजस्व क्षति की रोकथाम होगी।

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2. इसके अतिरिक्त, वित्त अधिनियम, 2016 में, अन्य बातों के साथ-साथ, आयकर अधिनियम, 1961(अधिनियम) के विभिन्‍न प्रावधानों के अन्तर्गत मौजूदा लाभ संबद्ध कटौतियों के लिए समापक तिथि की व्यवस्था की गयी।

3. उल्लिखित नीति के अनुक्रम में कराधान कानून(संशोधन) अधिनियम, 2019(टीएलएए) द्वारा इस अधिनियम में धारा 115खकक तथा धारा 115खकख अन्त:स्थापित की गयी ताकि मौजूदा घरेलू कंपनियों के लिए 22 प्रतिशत तथा वस्तुओं अथवा चीजों के विनिर्माण अथवा उत्पादन अथवा अनुसंधान अथवा उससे संबंधित वितरण में व्यस्त 1.10.2019 को अथवा उसके उपरान्त स्थापित कंपनियों, जो 31.03.2023 तक विनिर्माण अथवा उत्पादन शुरू करती हैं, को कतिपय शर्तों के अधीन 15 प्रतिशत की रियायती दर का प्रावधान किया जा सके जिसमें यह शामिल है कि वे किसी भी विनिर्दिष्ट प्रोत्साहन अथवा कटौती का लाभ न लेती हों। यह भी प्रावधान किया गया है कि रियायती कराधान व्यवस्था का विकल्प देने वाली घरेलू कंपनियों को किसी न्यूनतम वैकल्पिक कर का भुगतान नहीं करना पड़ेगा।

4. वित्त विधेयक, 2020 द्वारा इस अधिनियम में धारा 115ख क ग अन्तःस्थापित करने का भी प्रावधान किया गया है ताकि व्यष्टियों तथा हिन्दू अविभाजित परिवार(एचयूएफ) को घटी हुई दर पर कर का भुगतान करने का विकल्प दिया जा सके बशर्ते कि वे विनिर्दिष्ट प्रोत्साहन अथवा कटौतियों का लाभ न लेते हों तथा कतिपय शर्तों को पूरा करते हों। उक्त रियायती कर व्यवस्था का विकल्प देने वाले व्यष्टियों अथवा एचयूएफ को न्यूनतम कर(एएमटी) का भुगतान भी नहीं करना पड़ेगा।

5. निगमित कर दरों में कमी के तर्ज पर वित्त विधेयक, 2020 द्वारा इस अधिनियम में धारा 115ख क घ को अन्तःस्थापित करने का प्रस्ताव भी किया गया है जिससे सहकारी समितियों के लिए रियायती कराधान व्यवस्था का प्रावधान किया जा सके, जिसमें वे 22 प्रतिशत की घटी हुयी दर पर कर का भुगतान करने का विकल्‍प दे सकती हैं, यदि वे किसी भी विनिर्दिष्ट प्रोत्समाहनो अथवा कटौतियों का लाभ न लेती हों। उक्त रियायाती कराधान व्यवस्था का विकल्प देने वाली सहकारी समितियों को भी किसी एएमटी का भुगतान नहीं करना पड़ेगा।

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(ख) तथा (ग) नई व्यवस्था में व्यष्टिगत करदाताओं के हाथों में अधिक निपटान योग्य आय देने का प्रावधान का प्रस्ताव किया गया है जिसका वह अपनी इच्छानुसार उपभोग अथवा निवेश कर सकता है।

(घ) सरकार करदाताओं को आयकर प्रतिदायों का भुगतान शीघ्रता से कर रही है। वित्त वर्ष 2019-20 से 31.01.2020 तक के दौरान प्रतिदायों को जारी करने का औसत समय करदाता द्वारा आयकर विवरणी(आईटीआर) के सत्यापन की तिथि से 59 दिवस है। इसके अतिरिक्त वित्त वर्ष 2018-19 में 50 प्रतिशत की तुलना में वित्त वर्ष 2019-20 में 30 दिन के भीतर 65 प्रतिशत प्रतिदाय जारी की गयी हैं। इससे तत्परता में जिसके साथ आयकर प्रतिदायों को जारी किया जाता है, महत्वपूर्ण सुधार का पता चलता है।

(ड.) कर निर्धारण वर्ष (एवाई) 2019-20 से पहले आयकर प्रतिदायों के लिए केवल 33175 मामलों में प्रतिदाय लंबित हैं जो इन कर निर्धारण वर्षों के लिए कुल प्रतिदायों का 0.0001 प्रतिशत है।

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2. कर निर्धारण वर्ष 2019-20 के लिए प्रतिदाय दावों वाली 2.3 करोड़ आईटीआर में से 2.21 करोड़ मामल्रों में प्रतिदायों पर कार्रवाई की गयी है जोकि मामलों का 92 प्रतिशत है। मौजूदा प्रावधानों के अनुसार शेष प्रतिदायों पर कार्रवाई की जा रही है जबतक कि निम्नलिखित कारणों के फलस्वरूप कोई अपवाद नहीं होता:

    1. करदाताओं द्वारा दाखिल की गयीं दोषपूर्ण विवरणियां: ऐसे मामलों में आयकर विभाग खामियों को दूर करने के लिए करदाता को पत्र भेजता है। जैसे ही खामियों को दूर कर दिया जाता है प्रतिदाय जारी कर दी जाती है।
    2. गलत कर क्रेडिट/दावे: इस परिदृश्य में विभाग अशुद्धियों को शुद्ध करने के लिए कर कटौतीकर्ताओं तथा करदाताओं को पत्र भेजता है तथा जैसे ही उन्हें संशोधित कर दिया जाता है प्रतिदाय जारी कर दी जाती है।
    3. करदाता द्वारा दी गयी गलत बैंक खाता सूचना के कारण विलंब: ऐसे मामलों में विभाग बैंक खाता ब्यौरे को वैध करने के लिए करदाता को सूचित करने हेतु पत्र भेजता है तथा ज्यों ही वैध बैंक खातों का ब्यौरा उपलब्ध हो जाता है, प्रतिदाय जारी कर दी जाती हैं।
    4. समीक्षाधीन मामले: कतिपय मामलों में जिनकी इस अधिनियम की धारा 143 की उपधारा (3) के अन्तर्गत समीक्षा की जा रही है, प्रतिदायों को कर निर्धारण के पूरा होने तक अधिनियम की धारा 241क के प्रावधानों के अनुसार रोक लिया जाता है।
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(च) मार्च, 2019 से सभी आयकर प्रतिदायों को इलैक्ट्रानिक समाशोधन सेवा के माध्यम से करदाताओं के बैंक खातों में सीधे जमा कर दिया जाता है। इससे करदाताओं को डाक द्वारा भेजे गये कागजी चैकों के निर्गम के पूर्व व्यवहार की तुलना में प्रतिदायों का अधिक शीघ्र एवं ज्यादा सुरक्षित क्रेडिट सुनिश्चित होता है।

2. छोटे-छोटे मामल्रों में प्रतिदाय की प्रक्रिया में गति लाने के लिए 50 हजार रूपए तक की प्रतिदाय बकाया मांग के समायोजन के बिना जारी की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त सरकार ने सीपीसी-आईंटीआर 2.0 परियोजना को स्वीकृति प्रदान की है जिसके पास महत्वपूर्ण उच्च प्रसंस्करण क्षमता होगी जिसके फलस्वरूप प्रतिदायों का ज्यादा शीघ्रता से निरधीरण एवं निर्गम होगा।

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http://164.100.24.220/loksabhaquestions/qhindi/173/AU1650.pdf

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